मौलाना सलमान नदवी की ‘सुलह अयोध्या’ की 3 शर्तों का जाएज़ा

मौलाना सलमान नदवी की ‘सुलह अयोध्या’ की 3 शर्तों का जाएज़ा

पिछले दिनों सलमान नदवी साहब ने भारत के मुसलमानों के ‘स्वयंभू नेता’ बनने का ऐलान करते हुए सालों पुराने बाबरी मस्जिद के मसले पर एक मुआहेदे की पेशकश कर डाली है, जिस पेशकश को सोशल मीडिया में ‘सुलह अयोध्या’ कहा जा रहा है!

▪सलमान नदवी साहब का जल्दबाज़ी में फ़ैसला ले कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार लेने का ये दूसरा मसला अभी पेश आया है…. हम वो दिन कैसे भूल सकते हैं जब “स्वयंभू ख़लीफ़ा” अबू बक्र अल-बग़दादी ने अपनी ख़िलाफ़त का ऐलान किया था तो हिंदुस्तान ही क्या पूरे आलम के उलमा अभी तहक़ीक़ ही में लगे ही थे कि सलमान नदवी साहब ने इस बन बैठे “ख़लीफ़ा” को मुबारकबादी भी दे डाली, और उस दाईश (ISIS) की तारीफ़ में क़सीदे पढ़े जिस की हरकतों की वजह से आज गल्फ़ के अक्सर मुमालिक में आशांति फैली हुई है!

सलमान नदवी अपने भावुक अंदाज़ में बात करते हुवे

▪ कुछ दिनों पहले सलमान नदवी साहब की एक विडियो देखी, जिसमें वो नदवा की क्लास में बड़े भावुक हो कर बातें कर रहे थे कि – “मुझ पर झूठ बांधा जा रहा है कि मैंने अल्लाह के घर का सौदा किया है, बल्कि मैंने बहुत बड़े शराइत के साथ मुआहेदा किया है!” इसके बाद वो काफ़ी भावुक होने लगते हैं और उन शराइत का तज़किरा करना शुरू करते हैं, उनमें तीन शराइत कुछ इस तरह से हैं:

‘सुलह अयोध्या’ के ख़्वाबी नुक़्तें:

1. आज के बाद भारत मे किसी भी मस्जिद को नुक़सान न पहुँचाया जाए!

2. हमें “मस्जिद-उल-इस्लाम” बनाने के लिए फ़ैज़ाबाद हाईवे पर अलग से जगह दी जाए!

3. बाबरी मस्जिद को गिराने वालों को सख़्त से सख़्त सज़ा हो!

▪आईय्ये अब ज़रा इन शर्तों का जाएज़ा लें, जो ‘सुलह अयोध्या’ के नाम से मशहूर हो रही हैं…

1. पहली शर्त यह है कि: ‘आज के बाद भारत मे किसी भी मस्जिद को नुक़सान न पहुँचाया जाए’: यह जो शर्त मौलाना ने अपने मन में सोच रखी है, उसे मीडिया ने आज तक नहीं बताया… बल्कि मीडिया तो विनय कटियार का वो बयान बता रहा है कि: “ताजमहल भी तेजोमन्दिर है!” …मौलाना साहब, इस बात की गारंटी कौन लेगा कि आज के बाद कोई भी मस्जिद और कोई भी मुस्लमान को बेजा नुक़सान नहीं पहुँचाया जायेगा? और मुआहेदा किसके साथ कर रहे हैं? ज़रा वो भी तो आप मुसलमानों के साथ साफ़ कीजिये… क्या यह समझौता उस पार्टी के साथ करना चाहते हैं जिस ने बाबरी मस्जिद की शहीदी के बाद कश्मीर में 40 मंदिर टूटे जाने का झूठा प्रोपेगन्डा चलाया था?

▪याद रहे कि सलमान नदवी साहब को मौलाना सज्जाद नौमानी साहब के “रोहिंग्या मुसलमानों जैसा हाल भारत के मुसलमानों का होने की तैयारी” वाले बयान पर बहुत आपत्ति हुई थी… वो India TV पर रिएक्ट तो ऐसे कर रहे थे गोया कि मोदी राज में सब “ALL IS WELL” है… जनाब जब आप की नज़र में संघी राज में सब कुछ अच्छा ही चल रहा है तो फिर आप बिला वजह यह शर्त क्यों रख रहे हैं कि अब भारत में कोई मस्जिद नहीं तोड़ी जायेगी? मस्जिद के क़ातिलों से मस्जिदों की सुरक्षा का वादा लेने का आपका भोलापन मुसलमान समझ नहीं पा रहे हैं!

2. दूसरी आप की शर्त है कि: “हमें फैज़ाबाद में ‘मस्जिद-उल-इस्लाम’ बनाने के लिए अलग से जगह दी जाए!”

जब आप ख़ुद ही अल्लाह के घर की ज़मीन का समर्पण बुतपरस्तों को करने को तैयार हैं तो फिर अलग से उन्हीं बुतपरस्तों से मस्जिद की जगह की भीख क्यों मांगी जा रही है? क्या मुस्लिम क़ौम इतनी ग़रीब हो चुकी है कि एक मस्जिद की जगह भी न ख़रीद सकें? जो क़ौम आप को सालों से चंदा देती आयी है, उस पर भरोसा करने कि बजाय आपका ऐसा क्या एजेंडा है कि आप क़ौम से ज़्यादा डबल श्री से मदद की उम्मीद बना रहे हैं?

▪आप एक जाहिल मुसलमान जितनी मालूमात तो ज़रुर रखते होगें कि जो लोग बाबरी मस्जिद की जगह पर ही मन्दिर बनाने की ज़िद लिए हुए हैं वो यह साबित करना चाहते हैं कि भारत में सभी मस्जिद, मंदिर तोड़कर बनाई गई हैं… और VHP ने बहुत पहले ही बाबरी मस्जिद के बाद की शिकार होनेवाली हजारों मसाजिद की लिस्ट एडवान्स में बनाई हुई है… क्या कोइ आस्था के नाम पर आप का लखनऊ का घर कोइ ‘लला’ के मंदिर के लिये मांगेगा तो आप हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए उसे अपवा घर देने को तैयार हो जाएँगे?

3. आप की तीसरी शर्त है कि: “बाबरी मस्जिद को गिराने वालों को सख़्त से सख़्त सज़ा हो!”

जनाब आप को इल्म भी है कि सज़ा कौन देता है? क्या बाबरी मस्जिद के क़ातिलों को सज़ा डबल श्री दिलायेगा या कोर्ट??? आप मुआहेदे की शर्तें रख रहे हैं डबल श्री के सामने और डिमांड आपकी कोर्ट से है??? इस आर्टिकल को पढ़ने वालों से पूछना चाहता हूँ क्या ये डिमांड भी इनकी सही है?

जस्टिस लिबरहान ने कहा था कि: “अगर मस्जिद तोड़ने वालों को सजा देने से पहले टाईटल सूट पर बात होगी तो मस्जिद तोड़ने वाले लोगों के केस पर असर पड़ेगा, इस लिए मस्जिद तोड़ने वालों को पहले सज़ा हो!”

इधर नदवी साहब एक पैर पर खड़े हैं कि आज के आज ही ‘सुलह अयोध्या’ हो जाए और मस्जिद की जगह मंदिर को देदी जाए, जबकि मस्जिद तोड़ने वालों का केस लखनऊ के कोर्ट में आराम की नींद सो रहा है, और कभी-कभी चुनाव के वक़्त जाग जाने का ढोंग करता है!

▪जनाब सलमान नदवी साहब, मुझे आप की सारी बातें बिना सर पैर की नज़र आ रही हैं! आप खुद कनफ़्यूज़ नज़र आ रहे हैं… या फ़िर यूँ कहें कि आप खु़द तैयार नहीं हैं कि मुआहेदा केसे और किस के साथ किया जाए? या फ़िर आप सब कुछ जानते बूझते भी अनजान और भोले बन रहे हैं???

➖मुझे यक़ीन है कि जब आप डबल श्री जैसे बातिल के एजन्टों से घोखा खाएँगे तब आपको एक दिन बाबरी मस्जिद की जगह मन्दिर के लिए देने के अपने फ़ैसले पर इन्शाअल्लाह ज़रुर पछतावा होगा… लेकिन ग़ौर करने का मक़ाम ये है कि मिल्लत की ग़ैरत बेच कर ख़ौफ़ और बुज़दिली में लिए गएे इस फ़ैसलें का मिल्लत को वो नुक़सान होगा जिसे हमारी आनेवाली नस्लें भी नहीं भर पाएेंगी!

ज़रा सोचिए!!!

-Moinuddin Ibn Nasrullah @PeaceMoin peace.moin@gmail.com

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