क्यूँ मुसलमानों को 5 एकड़ जमीन किसी भी कीमत पर कबूल नही करनी चाहिए? -Hasnain Khan

क्यूँ मुसलमानों को 5 एकड़ जमीन किसी भी कीमत पर कबूल नही करनी चाहिए? -Hasnain Khan

-Hasnain Khan

हो सकता है कुछ लोगों को लग रहा हो 5 एकड़ जमीन छोड़ना सिर्फ ये जज्बाती फैसला है, लेकिन अगर हम दूर अंदेसी से काम ले तो यह फैसला आने दिनों बहोत फायदेमंद साबित होगा।ان شاءالله

ये जो फैसला आया है ये सब मानते है इंसाफ नही हुवा है लेकिन ये झगड़ा समाप्त हो गया है। सिर्फ इस कि तारीफ इसलिए कर रहे है कि अब विवाद खत्म हुवा। हम सब ये जानते है के फैसला हालात के दबाव में आया है। इतने बड़े जुल्म ओर मुसलमान की जमीन को मंदिर को दे कर उस के बदले 5 एकड़ जमीन दी गई है। जिस से इन के जुल्म पे पर्दा पड़ जाए। इतनी बड़ी नाइंसाफी के बाद भी मुसलमान हिम्मत ही नही कर रहा है के फैसले के खिलाफ कुछ बोले। लगता है जो जिम्मेदार इस लड़ाई को लड़ रहे रिव्यु पेटिशन डालना चाहते है लेकिन उन को लोगो की तरफ से दबाव है के वो न करे।

हालांके इस से कोई सौहार्द नही बिगड़ रहा है। जो लोग 6 साल जहर उगल रहे थे अचानक उन्हें सौहार्द याद आने लगा है। एक न्यायीक प्रकिर्या के तहत अगर आप रिव्यु पेटिशन डाल दे तो कोई आसमान नही फट पड़ेगा। हमे कोई रोड पर जा कर दंगा नही करना, बसे नही जलानी, रेलवे की पटरी नहीं उखाड़नी सिर्फ न्यायीक प्रक्रिया से सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खट खटाना है। अगर आज हमारी हिम्मत साथ नही दे रही, हम उन लोगो को नाराज नही कर सकते, तो कम से कम हमे जमीन छोड़ देनी चाहिए। कम से कम अगर हम नही लड़ रहे तो सौदा भी न करे।

क्यूं के आज हालात के तहत हम कुछ नही कर सके तो क्या होवा हर वक़्त ये हालात नही रहेंगे। हमे नही मालूम आने वाले 10, 20 साल बाद हालात क्या होंगे। हो सकता है कोई इंसाफ पसन्द जज आये और उस वक़्त फैसले को उलट सके। आने वाली पेड़ी जो कांग्रेस के गुलामी में नही पली होगी उन को अल्लाह ये तौफीक दे को वो अपना हक हासिल करले। अगर हम लड़ नही सकते तो जमीन को ठुकरा  के लड़ाई खुल्ली रखनी चाहिए। ताकि जब हम या हमारी आने वाली पेड़ी अपना हक हासिल करने की पोजीशन में होतो ये सौदेबाजी रुकावट न बने। अल्लाह हमें सही फैसला कर ने की तौफ़ीक़ दे ओर उम्मत का रॉब दुश्मनो के दिल मे डाल दे। आमीन

-Hasnain Khan

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