“इससे ध्यान भटकाने के लिए” “उससे ध्यान भटकाने के लिए”

“इससे ध्यान भटकाने के लिए” “उससे ध्यान भटकाने के लिए”

निहायत ही अदब के साथ लिबरल/सेक्युलर गैंग से अनुरोध है कि अपना ये फालतू का थर्ड क्लास विश्लेषण हर वक़्त देना बंद कीजिए…अब बात ध्यान भटकाने से बहुत आगे निकल चुकी है।

मुसलमानों के खिलाफ होने वाले हर अमल पर ये लिबरल गैंग माफिया फ़ौरन अपना विश्लेषण देना शुरू कर देते हैं कि सरकार अपनी असफलता को छुपाने के लिए और जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा/वैसा कर रही है…

हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा रहा के हुकूमत ध्यान भटकाने के लिए स्टंट करती ही नहीं। करती है, दुनिया की कई हुकूमत करती ही हैं। मगर हमारे देश में ऐसा हमेंशा नहीं होता।

जैसा कि हाल में हुए कश्मीर की डेवलपमेंट पर कुछ लोगों ने कहना शुरू किया है कि हुकूमत अपनी इकोनॉमी पॉलिसी की नाकामयाबी को छुपाने के लिए कश्मीर में ऐसा किया है…

अल्लाह का वास्ता है थोड़ी तो अक्ल का इस्तेमाल करो. तुम्हें नज़र नहीं आ रहा कि इस देश में मुसलमानों के साथ क्या हो रहा है? ये आय दिन मुसलमानों के कतलेआम की धमकियां और “जय श्री राम” न बोलने पर मार डालना, ज़िंदा जला डालना, हिन्दू राष्ट्र बनाने की और संविधान को बदलने मांग करना की ये सब के पीछे सिर्फ ध्यान भटकाना मकसद है या फिर ये सब एक ख़ास मंसूबे के साथ किया जाने वाला काम है? आखिर उस पर बात क्यों नहीं की जाती के मौजूदा हुकूमत के बड़े बड़े नेताओं ने मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगल के इलेक्शन जीत कर आये हैं, और उनका मकसद ही मुसलमानों पर रोआब जमाना है।

असल में उस थर्ड क्लास विश्लेषण से हुकूमत की नियत साफ़ खुलकर लोगों के सामने नहीं आ पाती है और ख़ासकर मुसलमानों को लेकर हुकूमत का रवैया क्या है वो इस थर्ड क्लास विश्लेषण के आड़ में छुप जाता है…

क्या मुसलमान इस देश का ऐसा अनोखा प्राणी है के जिसका इस्तेमाल हमेंशा हुकूमत ध्यान भटकाने के लिए ही करेगी?
आखिर कितने दिन तक मुसलमानों को बलि का बकरा बनते रहना पड़ेगा?

या फिर ये “ध्यान भटकाने वाली गैंग” खुद इस तरह के थर्ड क्लास विश्लेषण जानबूझकर बाज़ार में छोड़ कर हुकूमत की मुसलमानों के नफरत में की गई हरकत पर पर्दा डालती है?

मोईनुद्दीन इब्न नसरुल्लाह @PeaceMoin

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